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एमएनएनआईटी में कोरोना से सुरक्षा के बनाये गये उपकरण

कोरोना से बचने के इन सेफ्टी इक्विपमेंट्स का आसानी से किया जा सकता है इस्तेमाल, सार्वजनिक स्थानों के साथ ही घर और दफ्तर में भी कर सकते हैं इस्तेमाल

कोरोना काल के बीच संगम नगरी से एक पॉजिटिव खबर मिल रही है । प्रयागाराज के मोती लाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिक संस्थान में तकनीक के जरिये कोविड 19 वायरस से बचने के लिये उपकरणों को बनाया गया है । संस्थान में वायरलाइजर,स्टरिल बिन, पेपर स्टरलाइजर ,वॉयरोशील्ड,हैंड्सफ्री वॉशबेसिन बनाया गया है । इन सभी के इस्तेमाल से करेंसी व फाइलों औऱ दूसरे दस्तावेजों के साथ ही मोबाइल पर्स घड़ी जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली वस्तुओं को कोरोना संक्रमण के खतरे से बचाया जा सकता है । यूवीसी आधारित इन उपकरणों के प्रयोग से रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामानों के साथ ही सरकारी दफ्तरों में पहुंचने वाले दस्तावेजों को कोरोना के असर से बचाया जा सकता है । हैंड्सफ्री वॉशबेसिन में नल खोलने से लेकर हाथों में लिक्विड शोप लगाने तक के लिये हाथ से बेसिन को छूना नहीं पड़ता है । कोरोना संकट के दौरान देश को कोविड 19 के कहर से बचाने के लिये एमएनएनआईटी ने यूवीसी लाइट पर आधारित वायरलाइजर ,स्टरिल बिन, पेपर स्टरलाइजर बनाया है इसके साथ ही वॉयरोशील्ड और हैंड्स फ्री वाश बेसिन भी तैयार की गयी है । इन उपकरणों की मदद से हम ऑफिस से लेकर घर तक में कोरोना वॉयरस के संक्रमण की चपेट में आने से खुद को व दूसरों की भी बचा सकते हैं । वॉयरलाइजर के जरिये दफ्तरों में इस्तेमाल से पहले सभी फाइलों औऱ दस्तावेजों को कोरोना समेत दूसरे वायरस से भी बचाया जा सकता है । वॉयरलाइजर में दस्तावेजों के साथ ही करेंसी को भी वॉयरस फ्री किया जा सकता है । वॉयरलाइजर में 5 से 10 मिनट तक फाइल ,पेपर औऱ करेंसी को रखकर 99 तक वायरस से मुक्त किया जा सकता है । इसी तरह से स्टरिल बिन में मोबाइल ,पर्स ,घड़ी ,चश्में ,जैसी रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली वस्तुओं को वॉयरस फ्री किया जा सकता है । वहीं लैमिनेशन मशीन की तरह काम करने वाली पेपरलाइजर मशीन से भी दस्तावजों को यूवीसी तकनीक के जरिये कोरोना वॉयरस से मुक्त किया जा सकता है । इसके साथ ही घरों से बाहर निकलने वाले लोगों के लिये वॉयरोशील्ड बनायी गयी है जो .1 एमएम की प्लास्टिर शील्ड से बनायी गयी है जिसको पहनकर चेहरे को वॉयरस के सीधे संपर्क में आने से रोका जा सकता है । इसके साथ ही हैड्सफ्री वॉश बेसिन बनायी गयी है जिसमें पैरों के इस्तेमाल से लिक्विड शोप लेिया जाता है औऱ हाथों को धुलने के लिये पानी भी पैरों से पैडल प्रेस करने पर ही मिलेगा । वॉश बेसिन के नीचे दो पैडल लगाये गये जिसे प्रेस करके लिक्विड शोप औऱ पानी निकलता है । संस्थान निदेशक प्रो. राजीव त्रिपाठी ने बताया कि संस्थान के वैज्ञानिक देश को कोरोना संकट से उबारने के लिए कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहें हैं । वहीं प्रोफेसर शिवेष शर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौर में इन उपकरण को सरकारी दफ्तरों के साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जा सकता है । स्कूल, कॉलेज, हास्टल, हॉस्पिटल कैंटीन जैसी जगहों पर भी इनको लगाकर कोरोना के संक्रमण को फैलने से  रोका जा सकता है । यही नहीं इन उपकरणों की मदद से कोरोना जैसे दूसरे वॉयरस से भी लोगों का बचाया जा सकता है । यूवीसी आधारित उपकरण का उपयोग बेहद सरल तरीके से करके कोरोना से इस ज़ंग में ख़ुद के साथ ही दूसरे देश वासियों की सुरक्षा की जा सकती है । 

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